विद्यालय का इतिहास

सन 1946 तक छिबरामऊ कस्बा के आसपास माध्यमिक शिक्षा प्रदान करने हेतु एकमात्र विद्यालय राष्ट्रीय विद्या मंदिर इंटर कॉलेज अकबरपुर, फर्रुखाबाद हुआ करता था। इसके बाद नगर के बुद्धिजीवियों व कुछ सम्भ्रांत लोगों के सहयोग से एक विद्यालय खोलने पर विचार किया गया। फलस्वरुप स्व. सर्वश्री राज किशोर दुबे, राम शंकर गुप्ता, बाबूराम गुप्त ‘वकील’, सतीश चंद्र पालीवाल आदि गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सन 1946 में नेशनल हाई स्कूल छिबरामऊ फर्रुखाबाद (वर्तमान में कन्नौज) की आधारशिला रखी गई तथा विद्यालय की प्रबंधकीय व्यवस्था इन्हीं लोगों के द्वारा संचालित रही। शनै: शनै: विद्यालय प्रगति करता रहा और इससे प्रभावित होकर स्व. लाला हीरा लाल जी वैश्य ने विद्यालय के विकास के लिए सहयोग स्वरूप एक लाख चांदी के सिक्के प्रदान किये। सेठ भगवत दयाल जी ने भी बड़ा आर्थिक सहयोग किया। वर्ष 1956 में विद्यालय को इंटरमीडिएट कला वर्ग की मान्यता प्राप्त हुई और विद्यालय का नाम हीरालाल वैश्य नेशनल इंटर कॉलेज रखा गया। कालांतर में विद्यालय को विज्ञान व वाणिज्य वर्ग में भी मान्यताएं प्राप्त हुई। कॉलेज के पितृ पुरुष कहे जाने वाले प्रधानाचार्य पंडित मुरारी शरण दीक्षित के कार्यकाल में विद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहा।
श्री मुरारी शरण दीक्षित के कार्यकाल में स्काउट- गाइड, एनसीसी, एनएसएस के क्रियाकलाप अपने चरमोत्कर्ष पर रहे। इस दौरान कई विद्यार्थी राष्ट्रपति स्काउट से सम्मानित हुए । साथ ही सन 1960 में विद्यालय में एनसीसी कंपनी की स्थापना हुई, जिसमें बड़ी भूमिका सेकंड लेफ्टिनेंट प्रकाश चंद्र (बाद में मेजर) ने निभाई जो सन 1959 में स्थापित ऑफिसर ट्रेनिंग स्कूल कामठी, नागपुर (महाराष्ट्र) से प्रथम बैच पास आउट एसोसिएट एनसीसी अधिकारी बने। भारत चीन युद्ध 1962 व भारत-पाक युद्ध 1965 के दौरान भारत सरकार के आदेश पर 1963 से 1968 तक सेना में अपनी सेवाएं प्रदान की। सैन्य सेवाओं के बाद विद्यालय की एनसीसी में पुनः कार्य किया। मेजर प्रकाश चंद्र के बाद विद्यालय की एनसीसी की दीर्घकालीन कमान भौतिकी प्रवक्ता मेजर (डॉ) आत्माराम शर्मा के हाथों में रही। विद्यालय में एनसीसी का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। वर्तमान में मेजर सन्दीप कुमार माधव इस गौरव को आगे बढ़ा रहे हैं।
अंग्रेजी के प्रवक्ता सेकंड लेफ्टिनेंट राम प्रकाश त्रिपाठी भी 1963 से 1967 तक विद्यालय में एनसीसी प्रमुख के पद पर रहे जिससे इस्तीफा देकर 1967 में उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए । बाद में इसी विद्यालय में श्री राम प्रकाश त्रिपाठी जी ने 1995 से 2001 तक प्रधानाचार्य के पद को सुशोभित किया। विभिन्न लोकसभा व विधानसभा चुनावों में विजयी होते हुए वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश सरकार में सहकारिता मंत्री रहे।
श्री मुरारी शरण दीक्षित जी के प्रयासों से विद्यालय में सन 1988- 89 से टंकण ,रंगीन फोटोग्राफी व बैंकिंग ट्रेड के साथ व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके साथ ही अन्य पाठ्यसहगामी क्रियाकलापों व खेलकूद गतिविधियों का भी सफलतापूर्वक संचालन होता रहा। विद्यालय के कई अध्यापकों को राष्ट्रपति पुरस्कार और राज्यपाल पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है जिनमें सर्वप्रथम श्री मुरारी शरण दीक्षित ‘पंडितजी’ (1981), चंद्र दत्त वाजपेई ( 2003) व मेजर डॉ आत्माराम शर्मा को 2013 में राष्ट्रपति पुरस्कार मिला। साथ ही इंद्र विक्रम सिंह राठौर ‘दद्दूजी’ (1986), केशव लाल शर्मा (1991) व पं राम प्रकाश त्रिपाठी को 1997 में राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त हुआ। विद्यालय में अच्छी पढ़ाई के लिये आदरणीय इंद्र विक्रम सिंह राठौर दद्दू जी, राजेंद्र पाल सिंह चंदेल , जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी, सुमित नारायण दुबे ‘निराधार’ , श्याम नारायण प्रधान , राकेश चंद्र हस्तिनापुरी, रामस्वरूप मिश्रा , सिद्धनाथ मिश्रा , बनवारी लाल गुप्त, मेजर प्रकाश चंद्र ,केशव लाल शर्मा , मेजर (डॉ) आत्मा राम शर्मा,आदि सदैव याद किए जाते रहेंगे।
वर्ष 2006 से मार्च 2025 तक विद्यालय में श्री जितेन्द्र सिंह यादव प्रधानाचार्य के पद पर आसीन रहे और बड़े अथक परिश्रम ,लगन एवं निष्ठा के साथ विद्यालय को संभाला। इनके कार्यकाल में वॉलीबॉल, कबड्डी खो-खो के साथ एथलेटिक्स की तहसील, जनपद व मंडल स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। साथ ही भवन निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया।
वर्तमान में विद्यालय के प्रधानाचार्य पद की कमान योग्य, कर्मठ एवं अनुभवी वरिष्ठ प्रवक्ता श्री राधा बल्लभ मिश्र के हाथों में है। वह अपनी संपूर्ण ऊर्जा विद्यालय की प्रगति हेतु समर्पित किए हुए हैं। यद्यपि उन्हें इस दायित्व का निर्वहन करते हुए अल्प समय ही हुआ है, फिर भी अनुशासन, पठन-पाठन, खेलकूद, कंप्यूटर शिक्षा ,सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में उन्होंने विद्यालय को नए शिखर पर पहुंचाया है। आज विद्यालय प्रशासन छात्र छात्राओं के लिए स्वच्छ एवं ताजा पेय जल, सभी शिक्षण कक्षों में विद्युत एवं सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, भवन की रंगाई-पुताई और स्वच्छता को लेकर काफी सजग है। सत्र 2025-26 के दौरान विद्यालय में तीन स्मार्ट कक्षा व ई -लाइब्रेरी की स्थापना वर्तमान नेतृत्व की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। आगामी सत्र 2026- 27 में विद्यांजलि योजना के तहत पुरातन छात्र समागम, अटल टिंकरिंग लैब की स्थापना व प्रोजेक्ट अलंकार के तहत विद्यालय में अवस्थापना सुविधाओं के विकास की महत्वाकांक्षी योजना है। आपके प्रयासों से विद्यालय में दो नई ट्रेड खुदरा बिक्री स्टोर( Retail:job Role) तथा IT & ITES ( सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएं ) पाठ्यक्रमों की शुरुआत होने जा रही है।
विद्यालय प्रबंधन का दायित्व श्री आलोक गुप्ता के लंबे कार्यकाल(2011 से 2022) के बाद श्रीमती मीनू आलोक गुप्ता संभाले हुए हैं, जिनकी योग्यता एवं चिंतन की छाप विद्यालय पर स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। पूर्व प्रबंधक श्री आलोक गुप्ता के विद्यालय की शिक्षण व अनुशासन व्यवस्था में गहरी रुचि होने व प्रबंधक मीनू आलोक गुप्ता के सफल दिशा-निर्देशन में विद्यालय नित नए आयाम गढ़ रहा है। आशा है कि नवीन व्यवस्था में आप सभी के सहयोग से विद्यालय एक दिन जनपद में प्रकाश पुंज के समान दैदीप्यमान होगा।